हरिद्वार : अखाड़ा परिषद की बैठक में संतों ने पहला शाही स्नान 11 मार्च को करने का फैसला लिया है। साथ ही कुंभ मेले में टैंट (तंबू) लगाने और पूर्व ही भांति शाही पेशवाई को निकालने का निर्णय लिया है। बैठक में 2010 के कुंभ से और बेहतर सारी व्यवस्थाओं को करने के लिए सरकार को कहा गया है। बैरागी कैंप, नीलधारा में मेला बसेगा और महामंडलेश्वर नगर स्थापित होगा। कथा पंडाल आदि भी लगाए जाएंगे।
शनिवार को मायादेवी मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अखाड़ा परिषद अध्यक्षमहंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि 2010 की तर्ज पर ही कुंभ आयोजित होगा। बैठक में लिए गए सभी निर्णयों को मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक में रखा जाएगा। बैठक के बाद सरकार से जल्द अखाड़ों को भूमि आवंटन कराने को कहा जाएगा। फरवरी तक सरकार को सारे काम पूरे कराने होगे। बैठक में मेला प्रशासन ने इसका आश्वासन दिया है। दो चरणों में चली बैठक में पहले चरण में अखाड़ों ने अपनी बैठक की और दोपहर बाद मंत्री मदन कौशिक व मेला प्रशासन के साथ अखाड़ा परिषद ने बैठक की। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मेले में टैंटों को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। भूमि आवंटन को लेकर फरवरी में फैसला होगा। अखाड़ों का पेशवाई को लेकर मेला प्रशासन की पूरी तैयारी है। कैंप को लेकर बाद में फैसला लिया जाएगा। बैठक में अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरी, महंत प्रेम गिरी, महंत धर्मदास, महंत किशनदास, महंत गौरीशंकर दास, महामंडलेश्वर सोमेश्वरानन्द, महंत रामशरण दास, महंत महेश मुनि, महंत रामरतन गिरी, महंत रविन्द्रपुरी, मुखिया महंत भगतराम आदि मौजूद थे।
महंत नरेंद्र गिरी ने कहा है कि सरकार 1 जनवरी 2021 को कुंभ मेला शुरु होने की अधिसूचना जारी करेगी। बीच बीच में स्नान पर्व यथावत चलते रहेंगे। लेकिन पहला शाही स्नान 11 मार्च को होगा। महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि बैरागी कैंप खाली नहीं होगा। सरकार को स्थायी समाधान निकालने को कहा गया है। इसके साथ ही अखाड़ा परिषद डबल बैंच में जाने की सोच रहे है।
इन तिथियों पर होंगे शाही स्नान-
महाशिवरात्रि का पहला शाही स्नान 11 मार्च 2021, सोमवती अमावस्या का दूसरा शाही स्नान 12 अप्रैल 2021, बैसाखी का तीसरा शाही स्नान 14 अप्रैल 2021 और चौथा स्नान चैत्र पूर्णिमा को 27 अप्रैल 2021 को संपन्न होगा। इन प्रमुख शाही स्नानों के हिसाब से तैयारियां चल रही हैं।

